Wednesday, October 6, 2010

काटों सी चुभती है तन्हाई ..


काटों सी चुभती है तन्हाई
अंगारों सी सुलगती है तन्हाई

कोई आ कर हम दोनों को हंसा दे

मैं रोता हूँ रोने लगती है तन्हाई

जब भी तेरे हिसार से निकलना चाहा

यादों के बीज बोने लगती है तन्हाई

रात के किसी हिस्से में, यह भी बेवफा हो जाती है
मैं नहीं सोता सोने लगती है तन्हाई
तुम से जुदा हो कर इस से ही दिल लगा लिया है
मर सा जाता हूँ जब खोने लगती है तन्हाई

Sunday, October 3, 2010

आज फिर..


तन्हा तन्हा, खोई खोई,मै और मेरी परछाई..
आज फिर दस्तूर निभाया सबने ,
आज फिर यादें घिर आयी
आज फिर बादें-सबां हुआ रोशन ,
आज फिर बहार चली आई
तन्हा तन्हा, खोई खोई ,मै और मेरी परछाई
आज फिर धड़कन बनी चंचल , आज फिर लफ्जों में गहराई
आज फिर मुस्कुराहट बनी बोझल आज फिर हँसतें- हँसते आँख भर आई
तन्हा तन्हा, खोई खोई ,मै और मेरी परछाई
आज फिर कसम खामोशी की, आज फिर मंजिल दूर नजर आई
आज फिर नव आस मै मन ,आज फिर आहट किसी की आई
तन्हा तन्हा, खोई खोई ,मै और मेरी परछाई

Saturday, October 2, 2010

तुम नहीं आयें..


जमाना आ गया रुसवाइयों तक , तुम नहीं आयें
जवानी आ गयी तनहाइयों तक, तुम नहीं आयें
धरा पर थम गयी आंधीं, गगन में कांपती बिजली
घटायें आ गयीं अमराइयों तक ,तुम नहीं आयें
नदी के साथ निर्झर की मिली पाती समंदर को
सतह भी आ गयी , गहराइयों तक , तुम नहीं आये
समापन हो गया तम में सितारों की सभाओ का
उदासी आ गयी अंगड़ाइयों तक, तुम नहीं आये
न शमां है , न परवाने , ये क्या महफ़िल -
की मातम आ गया शहनाइयों तक , तुम नहीं आयें
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Monday, September 20, 2010

प्यार का पहला ख़त .....................


प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नये परिन्दों को उड़ने में वक़्त तो लगता है।

जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था,

लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है।

गाँठ अगर पड़ जाए तो फिर रिश्ते हों या डोरी,
लाख करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है।

हमने इलाज-ए-ज़ख़्म-ए-दिल तो ढूँढ़ लिया है,
गहरे ज़ख़्मों को भरने में वक़्त तो लगता है।

Wednesday, September 1, 2010

मन से मन का मेल यही है........

मन से मन का मेल यही है ,प्रीत ऐसे ही दिल में पले
राधा ने जब कृष्ण को देखा ,आँखो में सौ दीप जले
होंठो पर ठहरी बातो को, नयनो की भाषा मिले

यूँ ही आँखो आँखो में प्यार की दास्तान बढे
राधा ने जब कृष्ण को देखा दिल में प्रीत के कमल खिले

सुन बंसी की लय कृष्णा की, राधा के दिल का फूल खिले
तेरे मेरे प्यार का गीत बस वैसे प्रीत की डगर चले
राधा ने जब कृष्ण को देखा संगीत प्यार का दिल में पाले

जिस एक राग को जल उठाते दोनो दिलो के दीपक
आज अपने मधुर मिलन में उसी राग का दौर चलेप्यास जो देखी थी उस दिन तेरे मीठे लबो पर
वही मीठी मीठी प्यास अब मेरे दिल में भी पाले
राधा ने जब कृष्णा को देखा मन में सौ दीप जले!!